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गांधी परिवार पर मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा आरोप: नेशनल हेराल्ड केस में ₹751 करोड़ की संपत्तियां जब्त

क्या है नेशनल हेराल्ड केस?

नेशनल हेराल्ड केस आज भारत की राजनीति में सबसे बड़ा विवाद बन चुका है। यह केस एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और यंग इंडिया लिमिटेड के बीच हुए लेन-देन को लेकर है। AJL ने 1937 में ‘नेशनल हेराल्ड’ नामक अख़बार शुरू किया था जिसे पंडित जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस पार्टी ने मिलकर स्थापित किया था।

2010 में यंग इंडिया नाम की एक कंपनी बनाई गई जिसमें राहुल गांधी और सोनिया गांधी की हिस्सेदारी लगभग 76% है। आरोप है कि यंग इंडिया ने AJL की 90 करोड़ रुपये की लोन राशि को माफ करवाकर ₹751.9 करोड़ की प्रॉपर्टी अपने नियंत्रण में ले ली।


🕵️‍♂️ ED की कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गांधी परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच शुरू की और अब अप्रैल 2025 में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। जांच के बाद ED ने कुल ₹751.9 करोड़ की संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। इसमें दिल्ली, मुंबई और लखनऊ जैसे शहरों की कई प्राइम लोकेशन पर स्थित संपत्तियां शामिल हैं।


📍 जब्त की गई संपत्तियां


🧨 कांग्रेस का जवाब

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भाजपा सरकार विपक्षी नेताओं को डराने के लिए ED और CBI जैसे संस्थानों का दुरुपयोग कर रही है।

राहुल गांधी ने भी ट्वीट किया:

“सच को दबाया नहीं जा सकता। सत्ता बदलती रहती है, लेकिन सच्चाई हमेशा जीतती है।”


📈 केस का राजनीतिक असर

इस केस ने 2024 लोकसभा चुनाव के बाद उठी राजनीतिक गर्मी को और तेज कर दिया है। जहां भाजपा इसे “कानून का राज” बता रही है, वहीं विपक्ष इसे “तानाशाही की हद” कह रहा है। जनता के बीच भी इस केस को लेकर मिलेजुले विचार सामने आ रहे हैं।


⚖️ कोर्ट में अगली सुनवाई

मामला अभी कोर्ट में लंबित है और अगली सुनवाई मई 2025 में निर्धारित है। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो गांधी परिवार को जेल भी हो सकती है, और कांग्रेस पार्टी की साख पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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